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तुम

ज़िन्दगी बहुत छोटी है मगर बड़ी खूबसूरत है और उस पे चार चाँद हो तुम और उस पे चार चाँद हो तुम कभी मेरी नज़रों से देखो खुदको क्या हो तुम मेरे, समझ जाओगे वफ़ा पे मेरी फिर न कभी शक करोगे वफ़ा पे मेरी फिर न कभी शक करोगे जो एक बार आ गये मेरे दिल में फिर न किसी और को चाहोगे चाह कर भी प्यार मेरा भूल न पाओगे चाह कर भी प्यार मेरा भूल न पाओगे मैं तो अपने ज़ख्मों से लड़ लूँगी हर चोट को सीने में प्यार का तोहफ़ा समझ दफन कर लूँगी तुम किस तरह प्यार निभाओगे तुम किस तरह प्यार निभाओनिभाओगे मेरा दर्द सिर्फ मेरा है तुमसे खुशियाँ निभाऊँगी तुम्हारे दर्द को भी अपना बना लूँगी ज़िंदगी निभाने का वादा किया है वफ़ा निभा जाऊँगी ज़िंदगी निभाने का वादा किया है वफ़ा निभा जाऊँगी मर कर भी सनम सिर्फ तुम्हें ही चाहूंगी मर कर भी सनम सिर्फ तुम्हें ही चाहूंगी
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ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है  लेकिन बदलियाँ हैं के थमती नहीं  कितना भागती हूँ धूप के पीछे  लेकिन शामें हैं के ढलती नहीं  डरती नहीं मैं किसी भी अन्जाम से लेकिन मुहब्बत है के सुकूं देती नहीं

आओ अजनबी बन जायें

आओ आज फिर एक बार  हम अजनबी बन जायें 
न हम तुमको पहचानें  न तुम हमें जानो
कुछ दायरों में सिमटे इन रिश्तों को फिर एक नयी रौशनी दें 
मिल कर भी न मिलें, और प्यार के सागर में हम डूब जायें
न तुम तैर कर हम तक आ सको न हम किनारा पा सकें,
बस इन प्यारे तूफानों में हम बहते रहें  और प्यार को अपने बंधनों से निकाल 
एक अथाह और असीम जिन्दगी

पहले सी

अब वो पहली सी शिद्दत नहीं रही,
वो हंसी,  बातें नहीं रही,
जिन्दा हूँ मैं पर वो पुरानी सी जिन्दगी नहीं रही,
लड़की तो हूँ पर वो पहले सी नहीं रही ।

मुहब्बत कुछ यूं निभाई

चेहरे पे न शिकन कभी आने दी
दर्द को कुछ यूं पी लिया
उनकी बेवफाई को दिल से लगा
अपनी बेइज्जती कुछ यूं समेट ली
वो हर शह में हमें तोड़ते रहे और हम हंस कर टूटते रहे
अपनी मुहब्बत कुछ यूं निभाई हमने।

दर्द

वो एक शहर था, वो एक गली थी,
जिसमें  गुम मेरी हंसी थी,
इधर उधर ढूंढा बहुत, मगर न मिलना था न मिली वो
परेशां होकर, एक खाका खींचा,
और लबों पे चस्पा कर लिया,
लरजते लबों को सबने देखा,
दिल के दर्द को दबाते हुए लरजे थे ये न कोई देख पाया।